मुख्य कार्यकारी संदेश

श्री प्रदीप मुख़र्जी

 

विकिरण एवं आइसोटोप प्रौद्योगिकी बोर्ड द्वारा तीन दशक तक की सेवा पूरी करने के अवसर पर विकिरण एवं आइसोटोप प्रौद्योगिकी बोर्ड (वि.आ.प्रौ.बो) के मुख्य कार्यकारी के रूप में, मैं अपको अभिवादन व्यक्त करता हूँ और असीम खुशी के साथ शुभकामनाएं देता हूं । वि.आ.प्रौ.बो को प्रौद्योगिकी, धन सृजन और अपने नागरिकों को बेहतर गुणवत्ता प्रदान करने के माध्यम से भारत को सशक्त बनाने की दृष्टि से शुरू किया गया था।

इस उपलब्धि को चिकित्सा और औद्योगिक उपयोगों, विकिरण प्रसंस्करण सेवाओं, आइसोटोप अनुप्रयोगों और विकिरण विश्लेषणात्मक सेवाओं के लिए परमाणु चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवा, अभियांत्रिकी और विकिरण प्रौद्योगिकी उपकरणों के क्षेत्र में असंख्य उपयोगकर्ताओं को दी गयी सेवाओं के द्वारा सफलतापूर्वक प्राप्त किया गया है।

हमारे माननीय प्रधान मंत्री को उनके दूरदर्शी प्रशासन एवं प्रयासों के लिए धन्यवाद ज्ञापित करता हु, उनके नीतिगत नेतृत्व के कारण भारतीय नागरिक आज लंबे और स्वस्थ जीवन जी रहे हैं । भारत में जीवन प्रत्याशा 1970-75 में 49.5 की आयु से में बढ़कर 2012-16 में 68.7 वर्ष हो गई है (स्रोत: राष्ट्रीय स्वास्थ्य रुपरेखा 2019). इसलिए स्वास्थ्य संरक्षक उत्पादों का बाजारों देश में बढ़ी हुई क्षमता, बेहतर उत्पादकता और बेहतर रोग निष्कर्ष की आवश्यकता है। वि.आ.प्रौ.बो ने भा.प.अ.के के साथ मिलकर, पूरे भारत में स्थित 300 से अधिक नाभिकीय औषध केन्द्रो में स्थापित विकिरणीय भेषज की स्वदेशी और सस्ती उपलब्धता सुनिश्चित करके इस क्षेत्र में सबसे आगे रहा है - एवं प.उ.वि के आदर्श वाक्य 'राष्ट्र की सेवा में परमाणु' को सार्थक किया है ।

वि.आ.प्रौ.बो ने हाल ही में पी.ई.टी प्रतिबिंबन के लिए 68 जी-सूचक नैदानिक विकिरणीय भेषज का प्रमोचन करके नए विकिरणीय भेषजों की अपनी क्षमता में सुधार किया है और प्रोस्टेट ग्रंथि कर्करोग प्रबंधन के लिए नियमित रूप से चिकित्सीय जोड़ी - पीईटी प्रतिबिंबन के लिए 68 एम्.ए-पी.एस.एम्.ए और 177 एलयु - पी.एस.एम्.ए की आपूर्ति और उत्पादन करता रहा है जो की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है । भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (भा.आ.अ.प) का अनुमान है कि भारत में 2020 तक 17 लाख से अधिक नए कर्करोग के मामले दर्ज करने और 8 लाख से अधिक मौतों की संभावना है। भारतीय कर्क रोग पीड़ितों के एक प्रमुख वर्ग को नैदानिक ​​और चिकित्सीय विकिरणीय भेषज के अपने विस्तृत सरणी और श्रृंखला से सुसज्जित करके वि.आ.प्रौ.बो इस चुनौती का सामना करने के लिए अच्छी तरह से तैनात है। स्नायु एवं अंतःस्त्रावी प्रणाली के ट्यूमर के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाले 131 आई-एम्.आई.बी.जी इंजेक्शन के नियमित उत्पादन के लिए एक अत्याधुनिक सुविधा की स्थापना एक और उल्लेखनीय उपलब्धि है । वि.आ.प्रौ.बो ने सफलतापूर्वक अप्रैल 2018 में सैंटियागो, चिली में 2 लाख टेक्नेसियम -99 एम् शीत प्रणाली की आपूर्ति करके विकिरणीय भेषज के निर्यात में अपना योगदान दिया।

देश की पहली औषधीय चक्रज कण त्वरक ( साइक्लोरट्रोन ) सुविधा 2002 में विकिरणीय औषध केंद्र (आरएमसी) में स्थापित की गई और आरएमसी-भा.प.अ.के और वि.आ.प्रौ.बो द्वारा संयुक्त रूप से संचालित की गई, जिसमें आज तक पीइटी रेडियोधर्मी अनुरेखक की आपूर्ति जारी है और 15000 से अधिक रोगी इससे लाभान्वित हुए हैं। पश्चिमी भारत में स्थलान्तरणीय अस्थि कर्करोग के पीईटी प्रतिबिंबन में इस्तेमाल होने वाले 18 ऍफ़ -सोडियम फ्लोराइड का उत्पादन के लिए यह एकमात्र सुविधा है। नवंबर 2019 में 18 ऍफ़ -ऍफ़ डी जी के पहले बैच को साइक्लोन -30 में परिवर्तनशील ऊर्जा चक्रज कण त्वरण केंद्र (वि इ सी सी ), कोलकाता में सफलतापूर्वक बनाया गया जो की वि.आ.प्रौ.बो के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। यह चिकित्सा अनुप्रयोगों के लिए जर्मेनियम 68 रेडियोधर्मी आइसोटोप का उत्पादन करने के लिए देश में सबसे बड़ी और एकमात्र कण त्वरक सुविधा है और वि.आ.प्रौ.बो के लिए एक रोमांचक विकास का अवसर प्रदान करता है क्योंकि यह विशेष रूप से पूर्वी भारत क्षेत्र के लिए सस्ती पीईटी विकिरणीय भेषज प्रदान करेगा। गैलियम -68 और पैलेडियम -103 आइसोटोप के यथावत उत्पादन के लिए जर्मेनियम -68 / गैलियम -68 जनक-यन्त्र जो कि क्रमशः स्तन कर्करोग निदान और प्रोस्टेट कर्करोग के उपचार के लिए उपयोग की जाती है इसके निर्यात कि क्षमता कि आशा की जाती हैं।

वि.आ.प्रौ.बो ने भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों के विभिन्न प्रकार के यंत्र और उपकरणों के लिए दीप्तिशील एवं विभिन्न आकारों, आकृतियों की ट्रिसियम स्रोत की नियमित आपूर्ति को जारी रखा है और पिछले वर्ष के दौरान 21000 से अधिक टीएफएस स्रोतों की आपूर्ति की गई थी। वि.आ.प्रौ.बो ने इस अवधि के दौरान देश के विभिन्न स्थानों पर खाद्य उत्पादों के जीवनावधि विस्तार और स्वास्थ्य उत्पादों के कीटाणुशोधन अनुप्रयोगों के लिए गामा विकिरण प्रसंस्करण संयंत्रों (जीआरपीएफ) की स्थापना के लिए नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए वि.आ.प्रौ.बो के इतिहास में सबसे बड़ा निर्यात आदेश जुलाई 2018 में निष्पादित किया गया था जिसमें यूनाइटेड किंगडम में 1 मेगा क्यूरी के कोबाल्ट-60 टेलीथेरेपी (दूरचिकित्सा) स्रोत की आपूर्ति की गयी थी । एक अन्य निर्यात आदेश जिसमे (जीसी 5000 - 27959 सीई) को अनुसंधान उद्देश्यों के लिए वियतनाम में निष्पादित किया गया था। रुधिर विकिरणन इकाइयां रक्त आधान के रोगियों में निरोपित बनाम पोषद रोग (जीवीएचडी) की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और इस अवधि में भारत के विभिन्न अस्पतालों में वि.आ.प्रौ.बो ने ऐसी चार इकाइयों (सीएस -137 स्रोत -9116 सीई) की आपूर्ति की। वि.आ.प्रौ.बो ने विकिरणीय भेषज के स्वदेशी उत्पादन के अपने जनादेश को मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को जारी रखा है और विखंडन पर आधारित मॉलिब्डेनम-99 की आगामी उत्पादन सुविधा एक उन्नत चरण पर पहुंच चूकी है । सफल समापन पर, यह सुविधा आयातित मॉलिब्डेनम-99 पर प.उ.वि की आयात निर्भरता को समाप्त कर देगी और मॉलिब्डेनम-99 / 99 एम् टीसी कोलटेक जनित्र के उत्पादन के दायरे को बहुत बढ़ा देगी।

जैसा कि एक लोकप्रिय कहावत है - 30 साल की उम्र में, आप पीछे देखने के लिए पर्याप्त बृध्द हैं और आगे देखने के लिए पर्याप्त युवा हैं । वि.आ.प्रौ.बो , प.उ.वि की गतिविधियों के क्षितिज में अपना विशिष्ट स्थान बनाए रखते हुए “मानव जीवन की गुणवत्ता” को बेहतर बनाने के लिए, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए, विज्ञान और प्रौद्योगिकी को जारी रखने के लिए नए सिरे से ध्यान और ऊर्जा के साथ रोमांचक चौथे दशक के लिए तत्पर है।

धन्यवाद और जय हिंद !

मुख्य कार्यकारी वि. आ. प्रौ. बो. : एक परिचय , श्री. प्रदीप मुखर्जी, उत्कृष्ट वैज्ञानिक और मुख्य कार्यकारी, ब्रिट- भारतीय इंजीनियरिंग विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIEST), पश्चिम बंगाल (पूर्व में बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज) के पूर्व छात्र हैं, जहाँ से उन्होंने 1987 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। 1988 में बीएआरसी प्रशिक्षण स्कूल के 31वें बैच से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बीएआरसी ज्वाइन किया । आपने अनुसंधान रिएक्टर के डिजाइन निर्माण और कमीशनिंग के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य किये है ।

संपर्क:

 श्री. प्रदीप मुखर्जी

 उत्कृष्ट वैज्ञानिक ,मुख्य कार्यकारी

 विकिरण और आइसोटोप प्रौद्योगिकी बोर्ड

  सेक्टर 20,ब्रिट/बीएआरसी वाशी कॉम्प्लेक्स नवी मुंबई - 400703

 022-27840000/022-27887888

 chief[at]britatom[dot]gov[dot]in

श्री प्रदीप मुखर्जी, ब्रिट के मुख्य कार्यकारी का कार्यभार ग्रहण करते हुए