रेडियोइम्युनोएस्से किट्स

रेडियोइम्युनोएस्से (आरआईए) तकनीक का उपयोग जैव द्रवों में हॉर्मोन्स, विटामिन, औषधि या अन्य रसायनिकों की मात्रा पता करने के लिय किया जाता है ।

एंटीबॉडी-एंटीजन सम्मिश्र पर आधारित इस प्रक्रिया में इन जैविक तत्वों का आंकलन करने के लिये इनकी ज्ञात मात्रा में इस सम्मिश्र का स्टैंडर्ड ग्राफ तैयार किया जाता है, इस ग्राफ से अज्ञात तत्व की मात्रा स्टैंडर्ड ग्राफ से पता चल जाती है । चिह्नित एवं अचिह्नित एंटिजन के बीच सीमित एटीबॉडी के लिये स्पर्धात्मक प्रक्रिया में जैसे जैसे अचिह्नित तत्व की मात्रा बढ़ती जाती है है वैसे वैसे सम्मिश्र में रेडियोसक्रियता कम होती जाती है, इस आधार पर अज्ञात सैंपल में अचिह्नित तत्व की अत्यंत सूक्ष्मतम मात्रा का सही एवं सरलता से अनुमान लगाया जा सकता है ।

इम्युनोएस्से की एक अन्य विधि इम्युनोरेडियोमैट्रिक एस्से (इर्मा अथवा आईआरएमए) में हम चिह्नित एंटीजन का उपयोग ना करके असीमित चिह्नित एंटीबॉडी के साथ एंटिजन-एंटीबॉडी सम्मिश्र तैयार करते है यहां आरआईए के विपरीत हमें बंधित रेडियोसक्रियता में वृद्धि प्राप्त होती है, स्टैंडर्ड ग्राफ बनाने के बाद अज्ञात एंटीजन की मात्रा का इस ग्राफ से पता लगाया जा सकता है ।  हालांकि इर्मा विधि में कम समय लगता है तथापि एंटीबॉडी की रेडियोलेबलिंग अपने आप में एक कठिन काम है । थॉयराईड हार्मोन्स के आंकलन मे रेडियोइम्युनोएस्से की विशेष भूमिका रही है ।

ब्रिट विभिन्न रेडियोइम्युनोएस्से तकनीकियों के लिये आरआईए तथा इर्मा किट्स उपलब्ध कराता है । ब्रिट के डिब्रूगढ एवं बेंगलुरू स्थित प्रादेशिक केंद्र अन्य सेवाओं के अतिरिक्त रेडियोइम्युनोएस्से सेवायें भी प्रदान करते है । 

 

सतबीर सिंह सचदेव
वरिष्ठ महाप्रबंधक रेडियोफार्मास्यूटिकल्स (उत्पादन)

विकिरण एवं आइसोटोप प्रौद्योगिकी बोर्ड
ब्रिट/बीएआरसी वाशी सम्मिश्र
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