आइसोमैड

आइसोमैड भारत का प्रथम विकिरण संयंत्र है जिसकी स्थापना सन 1974 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से हुई थी । वास्तव में व्यावसायिक स्तर पर चिकत्सकीय एवम अन्य स्वास्थ्य रक्षा उत्पादों के निर्जर्मीकरण के लिये गामा विकिरण के उपयोग वाला यह एशिया भर का पहला  संयंत्र था ।

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आइसोमैड सयंत्र में कोबाल्ट-60 आधारित गामा विकिरण द्वारा उत्पादों को पूर्व निर्धारित समय के लिये संसाधित किया जाता है, इस दौरान इन उत्पादों को 25 किलोग्रे विकिरण मात्रा (डोस) प्राप्त होती है जिसके फलस्वरूप इन उत्पादों का निरजर्मीकरण संभव हो पाता है। 25 किलोग्रे की विकिरण डोस अंतर्राष्ट्रीय रूप से मैडिकल उत्पादों के निरजर्मीकरण के लिये सुनिश्चित की गई है । आइसोमेड संयंत्र गत चार दशकों से इस कम मे लगा हुआ है, इस असीम अनुभव के आधार पर ही आज ब्रिट निजी क्षेत्र में इस प्रकार के अन्य संयंत्र लगाने में अहम भूमिका निभा रहा है ।

आइसोमैड मुख्यतय: एन्टिबायोटिक पाउडर, आंखों के मरहम, पर्फ़्यूसन सैट, सर्व प्रकार के सूचर, सर्जिकल ब्लेड्स, कॉटन की पट्टियां, लेटेक्स दस्ताने,  आय्रुर्वेदिक कच्ची सामग्री, कॅथेटर, ड्रेप्स, ओरल इंप्लांट, दाई किट इत्यादि उत्पादों का निर्जर्मीकरण करता है ।

गामा विकिरण द्वारा निरजर्मीकरण एक शीत प्रक्रिया है अत: उष्मा संवेदी प्लास्टिक उत्पादों के निरजर्मीकरण के लिये भी यह उपयुक्त है। गामा विकिरण की उच्च भेदन क्षमता के फलस्वरूप किसी भी ज्योमितीय आकार के उत्पाद के लिये इसे प्रयोग में लाया जा सकता है। विभिन्न प्रकार की पैकेजिंग सामग्री का भी उत्पादों में इस्तेमाल किया जा सकता है। उत्पादों को अंतिम रूप से पैक करने के पश्चात भी इनका गामा निर्जर्मीकरण संभव है ।

Updated: Wednesday September 19, 2018 18:46