प्राय: पूछे गये प्रश्न

चिह्नित यौगिक एवं न्युक्लियोटाइड्स

चिह्नित यौगिक क्या है ?

चिह्नित यौगिक ऐसे यौगिक होते हैं जिनमें एक या एक से अधिक उपस्थित अवयव अणु स्थायी या रेडियोअक्टिव आइसोटोप से विस्थापित किये गये हों । उपयुक्त प्रिकर्सर, रिएजेंट और अभिक्रिया-पद्धति का उपयोग कर रसायनिक, ऍंज़ाइमिक अथवा जैवसंश्लेषणात्मक क्रियाओं द्वारा प्रस्तावित चिह्नित यौगिकों का संश्लेषण संभव है । यौगिकों में अमुक स्थान (1,2 या ?,?) पर, सामान्य रूप (G) से अथवा समान रूप (U) इन आइससोटोपों द्वारा यौगिकों का चिह्नन किया जा सकता है ।  इनके अनुप्रयोग के लिये आवश्यक है कि आइसोटोप की मात्रा कम से कम इतनी हो कि भौतिक स्तर पर मापा जा सके ।

चिह्नित यौगिक किन अनुप्रयोगों में प्रयोग में लाये जाते हैं ?

आइसोटोप चिह्नित यौगिकों के ट्रेसर के रुप में असंख्य विभिन्न उपयोग हमारे सामने विद्यमान हैं । अनुसंधान के क्षेत्र में भिन्न प्रकार के चिह्नित यौगिकों को विविध रूप से इस्तेमाल में लाया जाता है – विशेषकर रासायनिक, जैविक, आयुर्विज्ञान, कृषि, बॉयोटैक्नॉलॉजी और जॅनेटिक इंजिनियरिंग में इनका बहुमूल्य और विशाल योगदान रहा है । कालांतर में जीव विज्ञान के अध्ययन में  कितनी ही विषम गुत्थियों को सुलझाने में भी इनका सराहनीय योगदान रहा है - मूलभूत अध्ययन, संश्लेषण, कोशिकाओं द्वारा उपार्जन और ऍमिनो एसिड, पॉलिपैप्टाईड, प्रोटींस, न्युक्लिक एसिड ( डीएनऍ और आरएनऍ ), फैटी एसिड (लिपिड्स), कार्बोहाईड्रेट्स, प्रोस्टाग्लैंडिन्स, स्टीरॉय्डस, फिरोमोन्स के अतिरिक्त कई अन्य विशेष जैव यौगिकों की भूमिका एवं उनसे संबद्ध अभिक्रियाओं के विषय में अपार जानकारी हासिल कराने में चिह्नित यौगिकों ने विशिष्ट भूमिका निभाई है और अतुल्य योगदान दिया है । जैव-रसायनिक और फार्माकोलॉजी संबंधित विश्लेषण के अध्ययन में भी इन पर आधारित विधियों का बहुतायत में उपयोग हुआ है, अतिसूक्ष्म मात्रा (पॉइको – और फेम्टो स्तर) में इनका मापा और आंका जा पाना इनकी विभिन्न उपलब्धियों का प्रबल और प्रमुख कारण रहा है ।

न्युक्लिओटाईड्स क्या हैं ?

न्युक्लिओटाईड्स को वास्तव मे न्युक्लिक एसिड्स की मूलभूत ईकाई के रूप में देखा या समझा जा सकता है ठीक उसी प्रकार जैसे कि ऍमिनो एसिड्स प्रोटीन्स की और मोनोसॅकराईड्स कार्बोहाईड्रेट्स के मूल एकक होते हैं ।  न्युक्लिओटाईड्स अमुक परिस्थितियों में डीएनऍ और आरएनऍ के जलीकरण (हाइड्रोलिसिस) द्वारा उत्पन्न होते हैं । प्रमुख रूप से  न्युक्लिओटाईड्स में फॉस्फेट, रिबोस य डिऑक्सी रिबोस सुगर (पेंटोस) और प्युरीन (ऍडीनीन या गुऍनीन) या पिरिमिडीन  (सॉईटॉसीन, युरासिल या थाईमीन) रुपी नाईट्रोजन बेसों का समावेश रहता है । ऍडीनाइलिक एसिड (A), गुऍनिलिक एसिड (G), युरिडिलिक एसिड (U), सॉईटीडिलिक एसिड (C) और थाइमिडिलिक एसिड (T) 5 प्रमुख न्युक्लिओटाईड्स है ।

न्युक्लिओसाईड्स से क्या अभिप्राय है ?

न्युक्लिओसाइड्स से हमारा तात्पर्य  उन इकाईयों से है जिनमें हॅटरोसॉक्लिक नाइट्रोजन बेस प्युरीन (ऍडीनीन या गुऍनीन) या पिरिमिडीन  (सॉईटॉसीन, युरासिल या थाईमीन) के साथ एक पेंटोस शुगर ( रिबोस या डिऑक्सी-रिबोस) एन-ग्लाइकोसाइड बंध के द्वारा जुडी हो । ऍडीनोसीन, गुऍनोसीन, यूरीडीन, सॉईटीडीन और थाइमीडीन आदि 5 प्रमुख नुक्लिओसाईड्स पाये गये है । संक्षेप में कहा जाये तो नाइट्रोजन बेस और शुगर के बंध से न्युक्लिओसाईड प्राप्त होते है और नाइट्रोजन बेस, शुगर – फॉस्फेट के बंध से न्युक्लिओटाईड्स बनते है ।

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