रक्त किरणक - 2000

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीजों को खून चढाने के पश्चात इस बात की संभावना रहती है कि कहीं उन्हें टी - ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिजीज नामक बीमारी न धर दबोचे जो अक्सर जानलेवा साबित हो सकती है।

BI 2000 गामा विकिरण द्वारा रक्त कोशिकाओं का किरणन करने पर इस बात की समुचित पुष्टि हो चुकी है कि किरणित रक्त में टी - लिंफोसाइट्स की प्रचुरता मात्रा उस खतरनाक स्तर तक नहीं पहुंचती जिससे मरीज की जान को ही खतरा हो जाये। आज निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है क़ि रक्त किरणन 'टी - ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिजीज' समस्या का सर्वोत्तम उपाय या हल है।

ब्रिट ने बी आई - 2000 नामक कोबाल्ट-60 पर आधारित गामा किरणक का डिजाइन एवं विकास किया है जिसका मुख्य उद्देश्य मरीजों को दिए जाने से पहले रक्त को किरणित करके मरीज के लिए 'टी - ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिजीज' की संभावनाओं को समाप्त करना है । 810 क्यूरी कोबाल्ट-60 क्षमता वाले इस प्रकार के कई रक्त किरणक ब्रिट द्वारा अस्पतालों तथा रक्त बैंकों में संस्थापित किये जा चुके है। ये रक्त किरणक एक बार में 2 लीटर (2000 सीसी ) रक्त का किरणन करने की क्षमता रखते हैं इस लिए इन्हे रक्त किरणक - 2000 या ब्लड इरेडिएटर - 2000 का नाम दिया गया है।

Updated: Friday October 05, 2018 15:37